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बेईमान एंप्लॉयी को रंगे हाथ पकड़ने के लिए बैंकों ने भेजे नकली ग्राहक

बेईमान एंप्लॉयी को रंगे हाथ पकड़ने के लिए बैंकों ने भेजे नकली ग्राहक


मुंबई :- देश के बड़े बैंकों में से एक की ग्रामीण इलाकों की ब्रांच में एक शख्स पिछले महीने ग्राहक बनकर पहुंचा। वह 5 लाख रुपये के पुराने नोट के बदले नए नोट चाहता था और इसके लिए वह 50 प्रतिशत कमीशन देने को तैयार था। एक बैंक एंप्लॉयी उससे डील करने को तैयार हो गया, लेकिन उसे पता नहीं था कि बैंक ने उसके जैसे एंप्लॉयी से छुटकारा पाने के लिए खुद ही जाल बिछाया था ।


मल्टिनैशनल सहित निजी क्षेत्र के बैंक ऐसे बेइमान एंप्लॉयीज को रोकने की कोशिश कर रहे थे क्योंकि 8 नवंबर को नोटबंदी के ऐलान के बाद उनके पास ऐसी कई शिकायतें आई थीं। इन बैंकों ने ऐसे मामलों और गलत कर्मचारियों को पकड़ने के लिए फॉरेंसिक एक्सपर्ट्स को ग्राहक बनाकर भेजा। वे कर्मचारियों के दूसरे वेरिफिकेशन के साथ इसका भी पता लगा रहे हैं कि उनके खिलाफ कोई आपराधिक मामला तो दर्ज नहीं है।


बैंक कर्मचारियों के इस खेल की खबर आने के बाद इनकम टैक्स डिपार्टमेंट ने कई जगहों पर छापे मारे थे, जिनमें बड़ी मात्रा में नए नोट पकड़े गए थे। बैंकों की ब्रांच और कर्मचारियों के यहां भी छापे मारे गए थे। इसमें कई बैंक कर्मचारियों को गिरफ्तार और उसके बाद उन्हें नौकरी से हटा दिया गया। एक फॉरेंसिक एक्सपर्ट ने बताया, 'बैंक जाल बिछा रहे थे और वे अपने ही कर्मचारियों के खिलाफ स्टिंग ऑपरेशन कर रहे थे।' देश के कुछ बड़े प्राइवेट बैंकों ने भी ऐसा किया। इसके लिए उन्होंने डेलॉयट, ईवाई, पीडब्ल्यूसी और केपीएमजी के फॉरेंसिक एक्सपर्ट्स हायर किए। बैंकों ने ऐसे मामले की जांच में विशेषज्ञता रखने वाली और बैकग्राउंड का पता लगाने वाली फर्स्ट अडवांटेज जैसी कंपनियों की भी मदद ली।


फाइनैंशल अडवाइजरी सर्विसेज, डेलॉयट टूश तोमात्सु इंडिया एलएलपी के पार्टनर के वी कार्तिक ने बताया, 'नोटबंदी के बाद कई बैंकों को लगा कि पुराने ढर्रे से काम नहीं चलेगा। इसलिए उन्होंने अपनी तरफ से ब्रांचों में नकली ग्राहक भेजे। बैंक पता लगाना चाहते थे कि फर्जीवाड़ा रोकने के लिए उनका मौजूदा सिस्टम काफी है या नहीं। वे अपनी कमियों के बारे में भी जानकारी हासिल करना चाहते थे।' एक्सपर्ट्स ने बताया कि बैंक एंप्लॉयीज की जांच करने के लिए ऐनालिटिक्स की मदद ले रहे हैं। वे अचानक किसी एंप्लॉयी को चुनते हैं और फिर उसकी जांच की जाती है। बैंकों और फॉरेंसिक एक्सपर्ट्स ने यह नहीं बताया कि ऐसी जांच में कितने कर्मचारी पकड़े गए और उनके खिलाफ क्या ऐक्शन लिया गया है।

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