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आईआईटी में कई सीटें रह जाती हैं खाली ।

आईआईटी में कई सीटें रह जाती हैं खाली ।


भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) की संख्या हर साल बढ़ती जा रही है लेकिन दूसरी तरफ आईआईटी में सीटें खाली रहने की तादाद भी बढ़ता जा रहा है। 2014 में जहां आईआईटी में 650 सीटें खाली रह गई थी तो 2013 में आईआईटी में चार सौ से अधिक सीटें खाली रह गई थी तो इस बार 25 हजार छात्रों ने एडवांस्ड की परीक्षा के लिए पंजीकरण नहीं कराया।

जेईई-एडवांस्ड कमेटी के पूर्व चेयरमैन एचसी गुप्ता कहते हैं कि  कई छात्र ऐसे होते हैं, जो अपने घर से दूर जाकर नहीं पढ़ना चाहते। चूंकि आईआईटी हर राज्य में नहीं हैं। ऐसे में ये छात्र जेईई-मेन के स्कोर के आधार पर अपने राज्य के इंजीनियरिंग कॉलेजों में दाखिला ले लेते हैं। 2014 में आईआईटी जेईई एडवांस की काउंसलिंग के प्रमुख रहे एम.के.पानिग्रही कहते हैं कि कुछ छात्र मनपसंद संकाय न मिलने की वजह से छोड़ देते हैं कुछ को उनकी प्राथमिकता वाली आईआईटी में दाखिला नहीं मिलता है। इस वजह से सीटें खाली रह जाती है। 

उन्होंने कहा कि इसके लिए आईआईटी ने 2014 काउंसलिंग के बाद सीट सुनिश्चित करने के लिए एक अतिरिक्त दिन दिया था ताकि अधिक छात्र दाखिला ले सकें। एक छात्र के लिए अनिवार्य किया गया था कि 50 विषयों के विकल्प भरें क्योंकि पिछली बार देखने में आया था कि छात्र सीमित विकल्प भरते थे जिससे काउंसलिंग में उन्हें दाखिला नहीं मिलता था पर इससे अधिक फायदा नहीं मिला।

आईआईटी खड़गपुर के एक प्रोफेसर ने बताया कि पिछली बार आईआईटी में दाखिला वापस लेने का ट्रेंड देखने में आया था। आईआईटी में सीटें खाली रहने का कारण नए आईआईटी के बजाए एनआईटी या राज्य के उम्दा इंजीनियरिंग कॉलेज को तरजीह देना है। नए आईआईटी के मुकाबले छात्रों का स्थापित एनआईटी पर अधिक भरोसा भी एक कारण है।

आईआईटी और राज्य स्तर के इंजीनियरिंग संस्थानों में दाखिले के लिए दो परीक्षा होती हैं। पहली जेईई-मेन और दूसरी एडवांस्ड। एडवांस्ड में बैठने के लिए सिर्फ दो मौके मिलते हैं। वहीं जेईई-मेन की परीक्षा तीन बार दी जा सकती है। जेईई-मेन की परीक्षा एडवांस्ड की क्वालिफाइंग परीक्षा होती है। मेन की परीक्षा के शीर्ष डेढ़ लाख छात्र आईआईटी के लिए एडवांस्ड की परीक्षा देते हैं। मेन की परीक्षा सीबीएसई बोर्ड और एडवांस्ड की परीक्षा आईआईटी आयोजित करता है।

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