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मुंह में पेंसिल व पेन लेना जानलेवा हो सकता है

मुंह में पेंसिल व पेन लेना जानलेवा हो सकता है


जानलेवा हो सकता है मुंह में पेंसिल व पेन लेनामुंह में पेंसिल व पेन लेना जानलेवा हो सकता है पढ़ते-लिखते वक्त मुंह में पेंसिल या पेन लेने की आदत है तो जरा संभल जाएं। स्कूल में बच्चे कई बार एक-दूसरे की पेंसिल या पेन इस्तेमाल करते हैं। इसे मुंह में रखना जानलेवा साबित हो सकता है। इस बात को हल्के में ना लें। क्योंकि ऐसा करना संक्रामक रोग डिप्थीरिया का कारण बन सकता है।डिप्थीरिया से हर वर्ष सैकड़ों मरीज पीड़ित हो रहे हैं और दर्जनों लोगों की मौत हो रही है। इस साल भी डिप्थीरिया के 21 मामले आ चुके हैं, जिसमें तीन लोगों की मौत हो चुकी है। इसका खुलासा आरटीआइ से हुआ है। महर्षि वाल्मीकि संक्रामक रोग अस्पताल द्वारा दिए गए जवाब के अनुसार हर साल डिप्थीरिया व खसरे से बच्चों की मौत होती है। बेशक खसरा के मरीज अधिक होते हैं, पर डिप्थीरिया जिंदगी अधिक ले रहा है।कृष्णा नगर निवासी नरेंद्र शर्मा ने अस्पताल में आरटीआइ दायर कर पूछा था कि 2009 से लेकर मई, 2014 तक अस्पताल में संक्रामक रोगों से पीड़ित कितने लोग भर्ती कराए गए और उनमें से कितने मरीजों की मौत हुई।14 जून को दिए जवाब में अस्पताल की अतिरिक्त चिकित्सा अधीक्षक डॉ. सीमा मुखर्जी ने बताया है कि 2009 से लेकर 12 मई, 2014 तक 601 मरीजों की मौत हुई, जिसमें 455 मरीजों की मौत डिप्थीरिया की वजह से हुई। जबकि 37 बच्चों की मौत खसरा से हुई है। इस साल खसरा के 726 मरीज आ चुके हैं, जिसमें से तीन की मौत हो गई।यह एक गंभीर संक्रामक बीमारी है। जो कोराइन बैक्टीरियम डिप्थीरी नामक जीवाणु से होता है। यह बीमारी गले से शुरू होती है और टांसिल को प्रभावित करती है। इसके कारण गले में दर्द, बुखार और नाक बहने लगती है। इससे हृदयाघात होने का खतरा रहता है, जिससे मौत हो जाती है। यह दो से 10 वर्ष की उम्र के बच्चों को अधिक होती है।

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