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पहले प्रधानमंत्री की आलोचना करना आसान था, लेकिन अब “राष्ट्र-विरोधी” तमगा मिलता है: जावेद अख्तर


पहले प्रधानमंत्री की आलोचना करना आसान था, लेकिन अब “राष्ट्र-विरोधी” तमगा मिलता है: जावेद अख्तर


दिग्गज लेखक और बॉलीवुड की मशहूर हस्ती जावेद अख्तर ने एक्सप्रेस ग्रुप से  बातचीत में राष्ट्रवाद की राजनीति और असहिष्णुता पर अपनी राय रखी है। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की नीतियों की आलोचना करने पर लोगों को राष्ट्र-विरोधी का तमगा दिए जाने की घटनाओं पर चिन्ता जाहिर करते हुए उसे देश में  बढ़ती असहिष्णुता बताया। उनके अनुसार आज आप खुलकर अपनी बात नहीं रख सकते है । 

उन्होंने कहा “पहले प्रधानमंत्री को लेकर बात करना, मजाक करना आसान था लेकिन आज के समय में ऐसा करने पर आप पर राष्ट्र-विरोधी होने का तमगा लगा दिया जाता है।” जबकि ऐसा पहले कभी भी नहीं था । 
जावेद अख्तर ने राजनीति से लेकर धर्म जैसे मुद्दों पर भी अपनी राय दी । जावेद अख्तर ने धर्म पर कहा, “विश्वास और आस्था अलग-अलग चीजें हैं, वहीं विश्वास को साबित कर पाना मुश्किल है, लेकिन यह किसी का निजी मामला होता है। ऐसे में धर्म का होना जरूरी है लेकिन उसे ऐसे रखना चाहिए जैसे किसी संग्रहालय में रखा जाता हो।”

वहीं असहिष्णुता के मुद्दे पर भी उन्होंने कहा, “ऐसा नहीं है कि इस समय हालत बहुत ज्यादा खराब है या सब कुछ गलत ही हो रहा है, लेकिन अगर आज फिल्म जाने भी दो यारों की तरह महाभारत का कोई सीकुअल शूट किया जाए तो शायद उसके खिलाफ लोग धरना , प्रदर्शन करना शुरू कर दे ।”  


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