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नोटबंदी :पत्नी का शव घर पर और पति  बैंक की लाइन में अंतिम संस्कार के लिए नहीं थे। पैसे


नोटबंदी :पत्नी का शव घर पर और पति बैंक की लाइन में अंतिम संस्कार के लिए नहीं थे। पैसे


नोटबंदी के बाद नकदी संकट के कारण एक व्यक्ति को अपनी पत्नी के अंतिम संस्कार के लिए भी पैसे नहीं मिले। गुरुवार सुबह 10 बजे राजेंद्र पांडे की 72 वर्षीय पत्नी चंद्रकला की कैंसर से मौत हो गई। पत्नी का अंतिम संस्कार करने के लिए उसके पास पैसे नहीं थे।


ऐसे में वह पत्नी का शव घर में छोड़कर बैंक में जमा लगभग पांच हजार रुपये निकलवाने गया, लेकिन तीन बजे तक लाइन में लगने के बाद भी पैसे नहीं मिल पाए। उसके तीन बेटे भी है, लेकिन कोई भी उसके काम नहीं आया। बाद में मीडिया कर्मियों व पार्षद के सहयोग से उसे 4000 रुपए मिल गए जिसके बाद वह अपनी पत्नी का संस्कार कर सका।



मूल रूप से बिहार के गया जिले के गांव आदमपुर निवासी राजेंद्र पांडे 2001 में पानीपत आया था और कई साल यहां डाई हाउस में काम किया। मौजूदा समय में वह शिवनगर स्थित एक टैक्सटाइल फर्म में सफाई का काम करता था।





नजदीक ही राजनगर में किराये पर कमरे में पत्नी चंद्रकला के साथ रहता था। राजेंद्र के अनुसार उसकी पत्नी दस माह से बीमार चल रही थी और बृहस्पतिवार को उसकी मोत हो गई।

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