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भोपाल गैस त्रासदी : 32 साल से जारी है इंसाफ के लिए जंग ।


भोपाल गैस त्रासदी : 32 साल से जारी है इंसाफ के लिए जंग ।


रायपुर ।  भोपाल गैस त्रासदी को गुजरे 32 साल हो गए, लेकिन इसकी यादें अब भी मंत्रालय के कुछ अधिकारियों, कर्मचारियों को परेशान करती हैं। उस मंजर को याद कर ये लोग सिहर उठते हैं। जान तो बच गई, लेकिन जिंदगी दवा खाते गुजर रही है।
भोपाल से रायपुर आ गए तो न मुआवजा मिला और न ही इलाज। खुद के खर्च पर दवा करा रहे हैं। छत्तीसगढ़ के मंत्रालय में ऐसे एक दर्जन से ज्यादा अफसर कर्मी पदस्थ हैं, जो व्यक्तिगत रूप से भोपाल गैस कांड से प्रभावित हुए थे । इनमें ज्यादातर लोग ऐसे थे, जो 2 दिसंबर, 1984 की उस सर्द रात में रजाई ओढ़कर घरों में सोए हुए थे । रात में रजाई में दुबके थे, इसलिए बच गए पर सीने में जलन, आंखों से रिसता पानी और घबराहट इनकी जिंदगी का हिस्सा बन चुका है।

'नईदुनिया" ने भोपाल में मिथाइल आइसो साइनाइट गैस के शिकार हुए कई कर्मचारियों से बात की । गैस त्रासदी के शिकार हुए कई अफसर कर्मी अब रिटायर हो चुके हैं। जो बचे हैं, वे रिटायरमेंट के कगार पर हैं। पशुपालन विभाग में तीरथ राम साहू, पंचायत विभाग में जमील अहमद, मुख्यमंत्री सचिवालय में पदस्थ केके मोटवानी, खाद्य विभाग में आरके चंद्रा, जनसंपर्क में अरविंद भार्गव, अवर सचिव अशफाक अहमद, हाकराराम दुबे, बीएल सोनी, पारसराम नाथ, बीबी शर्मा, एससी नोर्से, उप सचिव एलएल आदिले, एलएल ताम्रकार, सुनील विजयवर्गीय, सुधीर काले, वायपी दुपारे, आरपी त्रिपाठी, एसके तिवारी, सतीश शर्मा, उमेदी राय, केसी वर्मा सहित छत्तीसगढ़ के मंत्रालय में गैस त्रासदी के शिकार लोगों की लंबी सूची है ।

मौत छूकर गुजर गई

आर्थिक योजना एवं सांख्यकी विभाग में पदस्थ सेक्शन ऑफिसर लालजी शुक्ला इसी साल रिटायर होने वाले हैं । जिस रात गैस त्रासदी हुई थी वे रीवा से बस में भोपाल पहुंच रहे थे। उसी दिन उन्हें मंत्रालय में अपनी नौकरी जॉइन करना था। बस सुबह 4 बजे भोपाल पहुंची । 2 बजे गैस लीक हुई थी। रास्ते में बस में सभी को बेचैनी, सीने में जलन की शिकायत हुई । सुबह देखा तो चारों ओर शव पड़े थे । लालजी ने बताया कि उनके शरीर में चकते पड़ गए थे ।
लोग बदहवास भाग रहे थे
योजना विभाग में ही पदस्थ बाबू एनआर रात्रे को रात में बेचैनी हुई थी, लेकिन समझ नहीं आया कि क्या हुआ है । वे ठंड की उस रात बंद कमरे में रजाई के भीतर थे। सुबह देखा तो लोग बदहवास भाग रहे थे। बस स्टैंड, रेलवे स्टेशन, अस्पताल के सामने जहां देखो वहीं लाशों के ढेर लगे थे । बहुत से जानवर भी मरे पड़े थे। रात्रे का चेहरा सूज गया था। सीने में दर्द अब भी होता है ।

सुबह बेचैनी हुई तो पता चला

वित्त विभाग में सेक्शन ऑफिसर सतीश नामदेव को रात में पता नहीं चला कि कुछ हुआ है। तब उनकी नौकरी नहीं लगी थी। वे गहरी नींद में सोते रहे । सुबह उठे तो सीने और आंख में जलन महसूस हुई। फिर उल्टी होने लगी । तब पता चला कि गैस लीक हुई है । नामदेव बताते हैं कि जो डरकर सड़कों पर निकले वे सभी मारे गए। रात में लोग घरों में दुबके थे इसलिए कम नुकसान हुआ ।

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